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कावेरी इंजन के लिए फंडिंग बढ़ाएं: भारत की रक्षा में आत्मनिर्भरता

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प्रधानमंत्री मोदी से कावेरी इंजन के लिए अधिक फंडिंग की मांग: राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी कदम

हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पहले ट्विटर) पर #FundKaveriEngine ट्रेंड खूब वायरल हुआ। देशभर के नागरिक, रक्षा विशेषज्ञ और तकनीकी प्रेमी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कावेरी इंजन प्रोजेक्ट के लिए अधिक फंड देने की मांग कर रहे हैं। उनका मानना है कि इस प्रोजेक्ट को प्राथमिकता देकर भारत की सैन्य स्वावलंबन को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

कावेरी इंजन

कावेरी इंजन क्या है?
कावेरी इंजन भारत की गैस टर्बाइन रिसर्च एस्टेब्लिशमेंट (GTRE) द्वारा विकसित एक स्वदेशी जेट इंजन है, जिसे रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के अधीन बनाया गया है। यह इंजन लगभग 80 किलो न्यूटन का थ्रस्ट उत्पन्न करता है और शुरू में इसे हल्के युद्धक विमान तेजस के लिए डिजाइन किया गया था। इसका मकसद विदेशी जेट इंजन पर भारत की निर्भरता को कम करना है।

क्यों हो रही है देरी?
यह प्रोजेक्ट 1980 के दशक में शुरू हुआ था, लेकिन इसमें कई तकनीकी और अन्य समस्याएं आईं। थ्रस्ट की कमी, वजन का ज्यादा होना, और 1998 के परमाणु परीक्षणों के बाद लगे पश्चिमी प्रतिबंधों ने प्रोजेक्ट को काफी प्रभावित किया। इसके अलावा, भारत के पास पूरी तकनीकी विशेषज्ञता और उच्च ऊंचाई पर परीक्षण सुविधाएं नहीं थीं, जिससे प्रगति धीमी हुई।

कावेरी इंजन का भविष्य
हालांकि तेजस के लिए इसका इस्तेमाल फिलहाल संभव नहीं हो पाया है, लेकिन अब इस इंजन का एक उन्नत संस्करण बिना पायलट वाले विमान (UAV) जैसे घातक स्टेल्थ UCAV के लिए विकसित किया जा रहा है। इसमें निजी क्षेत्र की कंपनियां भी शामिल हो रही हैं, जैसे कि Godrej Aerospace।

सोशल मीडिया पर क्या हो रहा है?
#FundKaveriEngine हैशटैग के तहत लोग राष्ट्रीय गर्व व्यक्त कर रहे हैं और रक्षा तकनीक में स्वावलंबन के महत्व पर जोर दे रहे हैं। कई लोग प्रधानमंत्री मोदी से कावेरी इंजन को अधिक वित्तीय सहायता देने की अपील कर रहे हैं ताकि भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सके।

निष्कर्ष

कावेरी इंजन प्रोजेक्ट भारत की रक्षा तकनीक में स्वावलंबन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसे उचित फंडिंग और समर्थन मिले तो भारत भविष्य में विदेशी इंजन पर निर्भरता खत्म कर सकता है। इसलिए जनता और विशेषज्ञ प्रधानमंत्री से इस प्रोजेक्ट को प्राथमिकता देने की अपील कर रहे हैं।



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